2025 भारतीय शेयर बाजार के लिए एक मिश्रित लेकिन मजबूत साल साबित हुआ। साल की शुरुआत में वैश्विक टैरिफ युद्ध और भू-राजनीतिक तनावों से बाजार हिल गया, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की रिकॉर्ड खरीदारी ने इसे संभाला। निफ्टी 50 ने नवंबर में 26,326 का नया उच्च स्तर छुआ, जबकि सेंसेक्स 86,159 तक पहुंचा। पूरे साल निफ्टी ने लगभग 10% और सेंसेक्स ने 8-10% की बढ़त दी, जो मुद्रास्फीति को मात देने वाली रही।
हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) ने रिकॉर्ड 86 बिलियन डॉलर से ज्यादा की बिकवाली की, जिससे डॉलर में रिटर्न सिर्फ 4-5% रहा और भारत वैश्विक बाजारों में सबसे कम प्रदर्शन करने वाला प्रमुख बाजार बन गया। आईटी, फार्मा और कुछ फाइनेंशियल सेक्टरों में दबाव रहा, जबकि मेटल, ऑटो और रेलवे जैसे सेक्टरों ने शानदार प्रदर्शन किया।
वर्ष के अंत में पतली ट्रेडिंग और छुट्टियों के बीच बाजार ने सकारात्मक नोट पर समाप्त किया। 2026 में कमाई में 12-15% की रिकवरी, नीतिगत स्थिरता और संभावित FII वापसी से बाजार में नई रैली की उम्मीद है। भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल ग्रोथ निवेशकों के लिए लंबी अवधि में आकर्षक बनी हुई है। यह साल साबित करता है कि घरेलू ताकत वैश्विक चुनौतियों पर भारी पड़ सकती है।
2025 भारतीय शेयर बाजार के लिए एक यादगार लेकिन चुनौतीपूर्ण साल रहा। साल भर बाजार ने कई उतार-चढ़ाव देखे रिकॉर्ड ऊंचाइयां छुईं, फिर गिरावट आई और अंत में सकारात्मक नोट पर बंद हुआ। आइए इस साल के प्रमुख रुझानों को विस्तार से समझते हैं।
साल की शुरुआत वैश्विक स्तर पर अमेरिकी टैरिफ नीतियों और व्यापार युद्ध की आशंकाओं से हुई। अप्रैल में घोषित टैरिफ ने वैश्विक बाजारों को हिलाकर रख दिया। भारतीय बाजार भी इससे अछूता नहीं रहा। सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट आई, लेकिन घरेलू निवेशकों ने बाजार को सहारा दिया। डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DII) ने रिकॉर्ड 86 बिलियन डॉलर से अधिक की खरीदारी की, जो इतिहास की सबसे बड़ी सालाना खरीदारी थी।
इसके विपरीत, विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) ने रिकॉर्ड बिकवाली की। आईटी सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ, जहां क्लाइंट स्पेंडिंग में कमी और अमेरिकी अर्थव्यवस्था की अनिश्चितता के कारण 11-12% की गिरावट आई। फार्मा और कुछ फाइनेंशियल स्टॉक्स भी दबाव में रहे। नतीजतन, डॉलर में भारतीय बाजार का रिटर्न सिर्फ 4-5% रहा, जो वैश्विक स्तर पर सबसे कम था।
हालांकि, निफ्टी 50 ने नवंबर में 26,326 और सेंसेक्स ने 86,159 का नया ऑल-टाइम हाई बनाया। पूरे साल निफ्टी ने करीब 10% और सेंसेक्स ने 8-10% की बढ़त दी। यह मुद्रास्फीति से ऊपर का रिटर्न था। ब्रॉडर मार्केट में मिडकैप और स्मॉलकैप ने बेहतर प्रदर्शन किया, जहां कुछ सेक्टरों में 20-40% तक की बढ़त देखी गई।
सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो मेटल, ऑटो, बैंकिंग और रेलवे सेक्टर चमके। टाटा स्टील, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फिनसर्व जैसे स्टॉक्स ने मजबूत रिटर्न दिए। कॉपर से जुड़े स्टॉक्स में 100% से ज्यादा की तेजी आई। दूसरी ओर, आईटी और कुछ कंज्यूमर स्टॉक्स पिछड़ गए।
वर्ष के अंतिम दिनों में ट्रेडिंग वॉल्यूम पतला रहा। क्रिसमस और न्यू ईयर की छुट्टियों के कारण निवेशक सतर्क रहे। दिसंबर में बाजार 4-5 सत्रों तक गिरावट में रहा, लेकिन 31 दिसंबर को मजबूत रिकवरी हुई। अंतिम सत्र में सेंसेक्स 500+ अंकों की छलांग के साथ 85,000+ पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 26,100+ के करीब पहुंचा। यह साल का सकारात्मक समापन था।
मैक्रो फैक्टर्स ने भी भूमिका निभाई। रुपये में गिरावट आई (89.98 तक), जो FII आउटफ्लो और वैश्विक डॉलर ट्रेंड से प्रभावित था। गोल्ड और सिल्वर ने शानदार प्रदर्शन किया सिल्वर में 175% तक की बढ़त। IPO मार्केट रिकॉर्ड स्तर पर रहा, 365+ IPO से 1.95 लाख करोड़ जुटाए गए।
2026 की संभावनाएं काफी आशाजनक दिख रही हैं। ब्रोकरेज फर्म्स का अनुमान है कि कॉर्पोरेट कमाई 12-15% YoY बढ़ सकती है। FII की वापसी, नीतिगत स्थिरता, इंटरेस्ट रेट कट और इंफ्रास्ट्रक्चर बूम बाजार को नई ऊंचाई दे सकते हैं। हालांकि, वैश्विक टैरिफ, जियोपॉलिटिकल रिस्क और मुद्रास्फीति पर नजर रखनी होगी।
2025 ने साबित किया कि भारतीय बाजार की घरेलू ताकत कितनी मजबूत है। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद बाजार ने लचीलापन दिखाया। निवेशक लंबी अवधि में सकारात्मक बने रहें, क्योंकि भारत की ग्रोथ स्टोरी बरकरार है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सूचनात्मक और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। इसमें दी गई जानकारी, आंकड़े और विश्लेषण विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों (जैसे Trading Economics, Reuters, The Hindu BusinessLine, Economic Times आदि) पर आधारित हैं। यह किसी भी तरह से निवेश सलाह, सिफारिश या वित्तीय परामर्श नहीं है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है और पूंजी हानि हो सकती है। कृपया निवेश से पहले प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।

