भारत की तेज़ रफ्तार वाली गिग इकोनॉमी में पिछले कुछ सालों में लाखों युवाओं ने रोजगार पाया है। स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट, ज़ेप्टो जैसी कंपनियां घर बैठे ऑर्डर देने की सुविधा तो देती हैं, लेकिन इनके पीछे दिन-रात सड़कों पर दौड़ते डिलीवरी बॉयज की मेहनत छिपी रहती है। ये मेहनती लोग बारिश हो या तपती धूप, बीमारी हो या त्योहार – हर हाल में खाना पहुंचाते हैं। लेकिन उनकी अपनी जिंदगी में सुरक्षा की कमी लंबे समय से एक बड़ा सवाल बनी हुई थी।
अब 2026 की शुरुआत में एक ऐसी खबर आई है, जिसने इन डिलीवरी पार्टनर्स के चेहरों पर मुस्कान ला दी है। केंद्र सरकार ने सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 के तहत गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए नए ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं। इन नियमों के लागू होने के बाद स्विगी-जोमैटो जैसे प्लेटफॉर्म्स पर काम करने वाले डिलीवरी बॉयज को स्वास्थ्य बीमा, जीवन बीमा, दुर्घटना कवर और पेंशन जैसी सरकारी सुविधाएं मिल सकेंगी। यह कदम न सिर्फ इन वर्कर्स के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि पूरे देश की गिग इकोनॉमी को ज्यादा मजबूत और सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
क्यों आई यह जरूरत?
पिछले सालों में डिलीवरी बॉयज की जिंदगी काफी चुनौतीपूर्ण रही है। 10-मिनट डिलीवरी का दबाव, तेज रफ्तार में सड़क पार करना, ट्रैफिक जाम, खराब मौसम – ये सब उनके लिए रोजमर्रा की बात हो गई। कई बार दुर्घटनाएं हो जाती हैं, लेकिन बीमा क्लेम मिलना मुश्किल होता है। कई वर्कर्स ने शिकायत की कि कंपनियां एक्सीडेंट के बाद सिर्फ PDF बनाने को कहती हैं और असली मदद नहीं मिलती।
2025 के अंत में 31 दिसंबर को नए साल की पूर्व संध्या पर देशव्यापी हड़ताल की घोषणा हुई। स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट, अमेजन, फ्लिपकार्ट जैसे प्लेटफॉर्म्स के हजारों डिलीवरी पार्टनर्स ने न्यूनतम वेतन, काम के घंटों की सीमा और खासकर सामाजिक सुरक्षा (सोशल सिक्योरिटी) की मांग को लेकर आवाज उठाई। यूनियनों जैसे इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (IFAT) और तेलंगाना गिग वर्कर्स यूनियन ने कहा कि ये लोग कंपनियों को अरबों की कमाई करा रहे हैं, लेकिन खुद को कोई सुरक्षा नहीं मिल रही।
इन विरोध प्रदर्शनों और हड़ताल के दबाव के बाद सरकार ने तेजी से कदम उठाया। नए साल की शुरुआत में ही लेबर मिनिस्ट्री ने सोशल सिक्योरिटी नियमों का ड्राफ्ट जारी कर दिया, जिसमें गिग वर्कर्स को पहली बार औपचारिक रूप से सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया गया।
कौन-कौन सी सुविधाएं मिलेंगी?
ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, योग्य गिग वर्कर्स को निम्नलिखित लाभ मिल सकेंगे:
- स्वास्थ्य बीमा – अस्पताल में इलाज के लिए कैशलेस सुविधा
- दुर्घटना बीमा – काम के दौरान होने वाली दुर्घटना में मुआवजा
- जीवन बीमा – परिवार को आर्थिक सहायता
- पेंशन – लंबे समय तक काम करने के बाद रिटायरमेंट पर पेंशन
- अन्य लाभ – विकलांगता कवर, मातृत्व लाभ आदि
ये सुविधाएं सरकारी योजनाओं जैसे पीएम जन आरोग्य योजना से जुड़ी हो सकती हैं। सरकार ने e-Shram पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य बनाने की योजना बनाई है। 16 साल से ऊपर के हर गिग वर्कर का रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा।
पात्रता के लिए क्या शर्तें?
सभी डिलीवरी बॉयज को तुरंत लाभ नहीं मिलेगा। इसके लिए कुछ शर्तें रखी गई हैं:
- एक प्लेटफॉर्म (जैसे सिर्फ जोमैटो) पर काम करने वाले वर्कर को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 90 दिन काम करना होगा।
- अगर कोई वर्कर दो या ज्यादा प्लेटफॉर्म्स (जैसे स्विगी + जोमैटो) पर काम करता है, तो कुल 120 दिन काम करने होंगे।
- एक ही दिन में दो प्लेटफॉर्म्स पर काम करने पर उसे दो दिन गिना जाएगा।
यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि पार्ट-टाइम या मल्टी-प्लेटफॉर्म वर्कर्स भी लाभ उठा सकें।
कंपनियों की जिम्मेदारी बढ़ी
नए नियम सिर्फ वर्कर्स पर नहीं, बल्कि कंपनियों पर भी जिम्मेदारी डालते हैं। स्विगी, जोमैटो, उबर, ओला जैसी सभी एग्रीगेटर कंपनियों को अपने हर वर्कर का विवरण सरकारी पोर्टल पर अपलोड करना होगा। थर्ड-पार्टी एजेंसियों के जरिए काम करने वाले वर्कर्स भी इसमें शामिल होंगे। अगर कंपनियां नियमों का पालन नहीं करतीं, तो उन पर जुर्माना या कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
यह कदम कंपनियों के लिए चुनौती भी है और अवसर भी। पहले से ही कुछ कंपनियां अपने पार्टनर्स को सीमित बीमा देती थीं, लेकिन अब ये सुविधाएं सरकारी स्तर पर उपलब्ध होंगी, जिससे कंपनियों पर अतिरिक्त बोझ कम होगा।
डिलीवरी बॉयज की प्रतिक्रिया
हड़ताल कर चुके कई वर्कर्स इस खबर से खुश हैं। एक डिलीवरी पार्टनर ने कहा, “हम रोज 14-15 घंटे काम करते हैं, लेकिन बीमा के लिए हजारों रुपये जमा करने पड़ते थे। अब सरकार मदद कर रही है, ये बहुत बड़ी राहत है।” AAP नेता राघव चड्ढा ने इसे “छोटी लेकिन महत्वपूर्ण जीत” बताया और कहा कि प्लेटफॉर्म्स ने वर्कर्स की नहीं सुनी, लेकिन सरकार ने सुनी।
भविष्य में क्या बदलाव आएंगे?
यह ड्राफ्ट अभी फीडबैक के लिए जारी है। सभी स्टेकहोल्डर्स (वर्कर्स, कंपनियां, यूनियन) अपनी राय दे सकते हैं। फीडबैक के बाद नियम फाइनल होंगे और संभवतः 2026-27 के वित्तीय वर्ष से पूरी तरह लागू हो जाएंगे।
यह पहल भारत में गिग इकोनॉमी को ज्यादा सम्मानजनक और सुरक्षित बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। लाखों युवा जो रोजाना सड़कों पर मेहनत करते हैं, अब उनकी जिंदगी में थोड़ी स्थिरता और सुरक्षा आएगी।
डिस्क्लेमर: यह लेख विभिन्न विश्वसनीय समाचार स्रोतों (जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज18 हिंदी, न्यूजट्रैक, टाइम्स ऑफ इंडिया आदि) से एकत्रित जानकारी पर आधारित है। नियम अभी ड्राफ्ट स्टेज में हैं और अंतिम रूप में बदलाव संभव हैं। अपडेट के लिए आधिकारिक सरकारी वेबसाइट (श्रम मंत्रालय) या e-Shram पोर्टल की जांच करें। यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्य से लिखा गया है, किसी भी कानूनी सलाह के रूप में नहीं।
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