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दिल्ली जाफराबाद में गैंगवार: 41 राउंड फायरिंग, दो भाइयों की हत्या

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जाफराबाद गैंगवार: अवैध हथियारों की सियासी रंजिश में दोहरी हत्या, पुलिस पर गंभीर सवाल

नई दिल्ली, 18 दिसंबर 2025 – दिल्ली के जाफराबाद इलाके में हाल ही में हुई भयावह गोलीबारी ने एक बार फिर गैंगवार की भयानक तस्वीर पेश की है। 41 राउंड गोलियां चलाई गईं, जिनमें से 15 एक आरोपी को और 16 दूसरे को लगीं। यह घटना न केवल स्थानीय निवासियों में दहशत फैला रही है, बल्कि दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि ऐसी घटनाएं यहां ‘रूटीन’ हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्यों गैंग्स का नेक्सस टूट नहीं पा रहा? जेल में बंद हाशिम बाबा और फरार ‘नॉर्थ ईस्ट का वीरप्पन’ उर्फ कबूतर के गुर्गे खुलेआम हिंसा फैला रहे हैं, जबकि पुलिस केवल खोखों की गिनती कर रही है।

घटना का सिलसिला: दो भाइयों की क्रूर हत्या

सोमवार-मंगलवार की दरम्यानी रात को जाफराबाद-सीलमपुर क्षेत्र में दो भाइयों – नदीम और फाजिल – की निर्मम हत्या कर दी गई। आरोपी असद और उसके साथियों ने दो टर्किश जिगाना पिस्टलों से फायरिंग की, जिसके बाद मौके पर 41 बुलेट शेल बरामद हुए। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि यह हत्या अवैध हथियारों के धंधे में साझा ग्राहकों को लेकर उपजी रंजिश का नतीजा है।

नदीम और फाजिल अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त में लंबे समय से लिप्त थे। उनके खिलाफ पहले से आपराधिक मामले दर्ज हैं, फिर भी पुलिस की नजर इन पर न के बराबर रही। हत्या से ठीक पहले दोनों पक्षों के परिवारों की एक बैठक हुई थी, जहां सुलह की कोशिश की गई, लेकिन असद ने साजिश रच ली। नदीम, जो शारीरिक रूप से अक्षम (रीढ़ की हड्डी में समस्या के कारण) था, हमेशा किसी सहयोगी के साथ रहता था। हाल ही में उसने अपने भाई फाजिल को यह जिम्मेदारी सौंपी, जो असद को नागवार गुजरा।

पृष्ठभूमि और गैंग कनेक्शन: पुरानी अदावत का बदला

असद, नदीम और फाजिल कभी एक साथ काम करते थे। पांच साल पहले ये सभी सलीम उर्फ ‘सलीम पिस्टल’ के संपर्क में आए, जो पाकिस्तान से विदेशी हथियार मंगाकर लॉरेंस बिश्नोई गैंग को सप्लाई करता था। 2018 में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से सलीम को 26 विदेशी पिस्टलों और कारतूसों के साथ गिरफ्तार किया गया था। नेपाल के रास्ते आई यह खेप उसके नेटवर्क का हिस्सा थी।

सलीम की गिरफ्तारी के बाद तीनों ने मिलकर धंधा संभाला, लेकिन धीरे-धीरे अदावत बढ़ी। नदीम ने असद की जगह फाजिल को पार्टनर बनाया, जिससे असद को शक हुआ कि नदीम उसके और उसके दोस्त बॉबी उर्फ कबूतर (हाशिम बाबा का गुर्गा) की जानकारी पुलिस को लीक कर रहा है। कबूतर, जो ग्रेटर कैलाश में नादिर शाह हत्याकांड से जुड़ा है, पिछले कई वर्षों से फरार है। जांच में असद का हाशिम बाबा से अप्रत्यक्ष संबंध भी सामने आया है, जो जेल से ही साजिशें रच रहा है।

सलीम का गैंग व्यापक है, जिसमें अकबर धोबी, बॉबी शूटर और इमरान जैसे सदस्य शामिल हैं। नदीम खुद पिस्टल रिपेयरिंग का काम करता था और बाद में अपना अलग सेटअप खड़ा कर लिया। 2024 में नदीम-फाजिल को गिरफ्तार किया गया, लेकिन बेल पर रिहा होकर वे फिर सक्रिय हो गए। इसी साल सितंबर में स्पेशल सेल ने असद के भाई अनस को मुजफ्फरनगर एनकाउंटर में पकड़ा, जिसके ऊपर नाबालिग अवस्था में कई हत्याओं के मामले हैं।

पुलिस की नाकामी: सवालों का पुलिंदा

यह घटना दिल्ली पुलिस के लिए शर्मिंदगी का सबब है। असद एक माह पहले जेल से रिहा हुआ था, उसके खिलाफ पांच से अधिक मुकदमे हैं, फिर भी निगरानी में चूक हो गई। सलीम के खिलाफ 14 मामले हैं, लेकिन वह जेल से ही ऑपरेट कर रहा है। कबूतर जैसे फरार अपराधी पर कोई कार्रवाई नहीं।

  • टाइमली इंटेलिजेंस की कमी: गोलीबारी की पूर्व सूचना क्यों नहीं मिली, जिससे आमजन को खतरा हुआ?
  • आसान बेलें: गंभीर अपराधियों को बेल क्यों मिल जाती है, और वे रिहा होते ही हिंसा क्यों फैलाते हैं?
  • हथियारों का स्रोत: अवैध हथियार पाकिस्तान-नेपाल रूट से कैसे आ-जा रहे हैं? गैंग्स का नेक्सस क्यों नहीं टूट रहा?
  • खुफिया तंत्र की कमजोरी: पुराने अपराधियों पर नजर क्यों नहीं? नॉर्थ ईस्ट जिले की पुलिस को मजबूत निर्देशों की जरूरत है।

पुलिस ने अब कई टीमें गठित की हैं, आरोपी रिश्तेदारों को हिरासत में लिया है, लोकेशन ट्रैकिंग और मोबाइल सर्विलांस पर काम चल रहा है। लेकिन गैंगवार से आम लोगों को खतरा बना रहेगा, जब तक गहन जांच और सुधार न हो।

यह केस दिल्ली के अंडरवर्ल्ड की गहराई उजागर करता है – जहां गैंग्स आसानी से पिस्टलें मंगाते हैं, जेल से कमांड देते हैं और पुलिस के हाथ खाली रह जाते हैं। दिल्ली पुलिस आयुक्त को तत्काल कदम उठाने चाहिए, ताकि नॉर्थ ईस्ट जैसे संवेदनशील इलाकों में शांति बहाल हो। गैंग्स को न्यूट्रलाइज करने के लिए इंटेलिजेंस सिस्टम मजबूत बनाना जरूरी है।

आपके विचार क्या हैं? क्या पुलिस की भूमिका प्रभावी होनी चाहिए? कमेंट्स में जरूर बताएं। धन्यवाद।

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