आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है, लेकिन इसके साथ बढ़ती अश्लीलता, अभद्र सामग्री और खासकर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी खतरनाक सामग्री समाज के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई है। भारत सरकार ने इस समस्या पर सख्त रुख अपनाते हुए 29 दिसंबर 2025 को सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के माध्यम से एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। इस एडवाइजरी में फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, यूट्यूब जैसी सभी प्रमुख सोशल मीडिया कंपनियों और ऑनलाइन इंटरमीडियरीज को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने प्लेटफॉर्म पर अश्लील, पोर्नोग्राफिक, भद्दी, यौन शोषण से संबंधित या किसी भी गैरकानूनी सामग्री को बिल्कुल अनुमति न दें। सरकार ने चेतावनी दी है कि यदि कंपनियां IT एक्ट 2000, IT नियम 2021 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) का पालन नहीं करतीं, तो उन्हें मुकदमों, जुर्माने और यहां तक कि सुरक्षित आश्रय (Safe Harbour) की सुरक्षा खोने का सामना करना पड़ सकता है। यह कदम बच्चों, महिलाओं और समाज की सुरक्षा को प्राथमिकता देने वाला है, जो बताता है कि डिजिटल दुनिया में स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी है। अब समय है कि सभी प्लेटफॉर्म्स अपनी कंटेंट मॉडरेशन नीतियों को मजबूत करें और शिकायतों पर 24 घंटे के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित करें। एक सुरक्षित इंटरनेट सबका अधिकार है!
डिजिटल युग में सोशल मीडिया ने संचार को बेहद आसान बना दिया है। कुछ ही क्लिक में दुनिया भर के लोग जुड़ जाते हैं, विचार साझा होते हैं, मनोरंजन होता है और व्यापार भी फलता-फूलता है। लेकिन इस चमक-दमक के पीछे एक काली सच्चाई भी छिपी है अश्लीलता की बाढ़, पोर्नोग्राफिक सामग्री का प्रसार और सबसे खतरनाक, बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री (Child Sexual Abuse Material – CSAM)। ये सभी चीजें न सिर्फ नैतिक रूप से गलत हैं, बल्कि भारतीय कानून के तहत गंभीर अपराध भी हैं।
इसी पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार ने 29 दिसंबर 2025 को एक सख्त और स्पष्ट एडवाइजरी जारी की है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा जारी इस परामर्श में सभी ऑनलाइन इंटरमीडियरीज, खासकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को चेतावनी दी गई है कि वे अश्लील, अभद्र, पोर्नोग्राफिक, यौन शोषण से संबंधित या किसी भी प्रकार की गैरकानूनी सामग्री पर प्रभावी रोक लगाएं। सरकार ने साफ कहा है कि लापरवाही बरतने वाली कंपनियां कानूनी कार्रवाई का सामना करेंगी।
सरकार की चेतावनी का मुख्य आधार क्या है?
मंत्रालय के अनुसार, हाल के समय में कई रिपोर्ट्स, जन शिकायतें, संसदीय चर्चाएं और न्यायालयीन टिप्पणियां आई हैं, जिनमें बताया गया है कि सोशल मीडिया पर ऐसी सामग्री लगातार फैल रही है जिसे कानून के अनुसार रोका जाना चाहिए। मंत्रालय ने पाया है कि कई प्लेटफॉर्म्स पर अश्लील और गैरकानूनी कंटेंट को पहचानने, रिपोर्ट करने और तुरंत हटाने में निरंतरता और सख्ती की कमी है।
एडवाइजरी में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इंटरमीडियरीज (सोशल मीडिया कंपनियां) को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 79 के तहत ‘सुरक्षित आश्रय’ (Safe Harbour) तभी मिलता है, जब वे उचित परिश्रम (Due Diligence) बरतें। इसका मतलब है कि प्लेटफॉर्म्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके यूजर्स ऐसी कोई सामग्री अपलोड, शेयर, स्टोर या ट्रांसमिट न करें जो:
- अश्लील (Obscene) हो
- पोर्नोग्राफिक (Pornographic) हो
- भद्दी या अभद्र (Vulgar/Indecent) हो
- यौन रूप से स्पष्ट (Sexually Explicit) हो
- बाल यौन शोषण से संबंधित (Paedophilic/CSAM) हो
- बच्चों के लिए हानिकारक हो
- या किसी भी कानून के तहत निषिद्ध हो
यदि कोई कंपनी इन निर्देशों का पालन नहीं करती, तो उसके खिलाफ IT एक्ट, भारतीय न्याय संहिता (BNS) और अन्य लागू आपराधिक कानूनों के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है। यह कार्रवाई न सिर्फ कंपनी पर, बल्कि प्लेटफॉर्म के मालिकों और यूजर्स पर भी हो सकती है।
IT नियम 2021 की महत्वपूर्ण बातें
2021 में जारी IT (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियमों में कई सख्त प्रावधान हैं, जिन्हें इस एडवाइजरी में दोहराया गया है। मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
- प्रोएक्टिव एक्शन: कंपनियों को सिर्फ शिकायत आने पर ही नहीं, बल्कि खुद सक्रिय रूप से ऐसी सामग्री की पहचान करनी होगी।
- 24 घंटे की समय सीमा: यदि कोई व्यक्ति अपनी निजता के उल्लंघन या यौन सामग्री की शिकायत करता है, तो उसे 24 घंटे के अंदर हटाना अनिवार्य है।
- कंप्लायंस फ्रेमवर्क की समीक्षा: सभी प्लेटफॉर्म्स को तुरंत अपने आंतरिक अनुपालन ढांचे, कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम और यूजर रिपोर्टिंग मैकेनिज्म की जांच करनी होगी।
- सुरक्षित आश्रय का खतरा: यदि कंप्लायंस नहीं हुआ, तो धारा 79 के तहत मिली सुरक्षा खत्म हो सकती है, जिससे कंपनी यूजर्स के कंटेंट के लिए सीधे जिम्मेदार हो जाएगी।
क्यों जरूरी है यह कदम?
भारत में इंटरनेट यूजर्स की संख्या 90 करोड़ से ज्यादा है, जिसमें बच्चे और किशोर बड़ी संख्या में शामिल हैं। सोशल मीडिया पर फैल रही अश्लील सामग्री न सिर्फ नैतिक पतन को बढ़ावा देती है, बल्कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डालती है। CSAM जैसी सामग्री तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपराध है और इसे रोकना सभी देशों की प्राथमिकता है।
सरकार का यह कदम महिलाओं, बच्चों और समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए है। इससे पहले भी कई बार ऐसी चेतावनियां जारी हुई हैं, लेकिन इस बार लहजा और सख्त है। सरकार ने साफ संकेत दिया है कि अब सिर्फ बातें नहीं, ठोस कार्रवाई होगी।
प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी बढ़ी
फेसबुक, इंस्टाग्राम (मेटा), एक्स (पूर्व ट्विटर), यूट्यूब, टेलीग्राम जैसी कंपनियां अब दबाव में हैं। उन्हें न सिर्फ AI टूल्स से कंटेंट स्कैन करना होगा, बल्कि मानव मॉडरेटर्स की संख्या बढ़ानी होगी। शिकायत निवारण अधिकारी (Grievance Officer) की नियुक्ति और पारदर्शिता रिपोर्ट प्रकाशित करना भी अनिवार्य है।
समाज की भूमिका क्या?
सरकार और कंपनियां अकेले यह जंग नहीं जीत सकतीं। हमें भी जिम्मेदार नागरिक बनना होगा। यदि कोई अश्लील या हानिकारक सामग्री दिखे, तो तुरंत रिपोर्ट करें। बच्चों को इंटरनेट उपयोग के नियम सिखाएं। डिजिटल साक्षरता बढ़ाएं।
केंद्र सरकार की यह एडवाइजरी एक स्पष्ट संदेश है, डिजिटल फ्रीडम के साथ डिजिटल जिम्मेदारी जरूरी है। यदि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स अब भी लापरवाही बरतते हैं, तो कानूनी कार्रवाई तय है। आखिरकार, एक सुरक्षित और स्वच्छ डिजिटल दुनिया सबके हित में है। उम्मीद है कि यह कदम न सिर्फ कंपनियों को जागरूक करेगा, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव भी लाएगा।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध समाचार रिपोर्टों पर आधारित है और इसे कानूनी सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। लेखक या प्रकाशक किसी भी प्रकार की गलत जानकारी, नुकसान या हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे। पाठक स्वयं आधिकारिक स्रोतों से जानकारी सत्यापित करें।

