एक सामान्य सायंकालीन भोजन की मेज पर बैठा युवक, मोबाइल पर आई एक कॉल ने उसकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी। खाना आधा छोड़, मां से बोला – “बस थोड़ी देर में लौट आऊंगा” और घर से निकल गया। लेकिन वो शाम उसकी आखिरी शाम साबित हुई। गोरखपुर के सहजनवां इलाके में 26 साल के विशाल यादव की जिंदगी सपनों से भरी थी – मुंबई में मेहनत की कमाई, परिवार की जिम्मेदारी, पिता की मौत के बाद घर संभालना और जल्द होने वाली शादी की तैयारी। लेकिन एक रात प्रेमिका की कॉल ने सब कुछ उलट-पुलट कर दिया। अगली सुबह गेहूं के खेत में उसकी मिट्टी से सनी, खून से लथपथ लाश मिली। सिर पर गंभीर चोटें, चारों तरफ संघर्ष के निशान, पास पड़ी चप्पलें और तौलिया – ये सब बता रहे थे कि मौत आसान नहीं थी, बल्कि बेरहमी से दी गई थी। यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि रिश्तों की जटिलता, प्यार के नाम पर छिपे खतरे और परिवार की टूटी उम्मीदों की कहानी है। आज जब पूरा इलाका सदमे में है, तो सवाल उठता है – वो कॉल किसकी थी? सच क्या है? क्या प्यार कभी इतना खतरनाक हो सकता है? यह कांड हमें याद दिलाता है कि जिंदगी की सबसे अनमोल चीज एक फोन कॉल में भी खत्म हो सकती है। न्याय की उम्मीद में परिवार आज भी रो रहा है।
एक सामान्य शाम का दर्दनाक अंत: गोरखपुर हत्याकांड की पूरी कहानी
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में स्थित सहजनवां थाना क्षेत्र के जोगिया कोल कटाई टीकर रोड के पास एक छोटा-सा गांव है, जहां जिंदगी अपनी रफ्तार से चलती है। खेतों में लहलहाती फसलें, सुबह-शाम की मेहनत और परिवार का साथ – यही यहां की आम जिंदगी है। लेकिन 23-24 दिसंबर 2025 की वह रात इस इलाके की सादगी को हमेशा के लिए बदल गई।
विशाल यादव, उम्र 26 साल, परिवार का बड़ा बेटा था। उसके पिता प्रकाश यादव की मौत 19 सितंबर 2025 को हो गई थी। डेढ़ महीने पहले हुए इस सदमे से परिवार अभी उबर भी नहीं पाया था। विशाल मुंबई में कार पेंटिंग और पॉलिश का काम करता था। वहां की कमाई से घर चलता था, छोटे भाई की पढ़ाई और मां शकुंतला देवी की छोटी-मोटी जरूरतें पूरी होती थीं। सोशल मीडिया पर भी वह काफी सक्रिय था। कई “धाकड़” स्टाइल की रील्स बनाकर वह लोगों का मनोरंजन करता था।
पिता के अंतिम संस्कार के लिए विशाल मुंबई से घर आया था। यहां वह कुछ दिनों रुका, क्योंकि एक शादी का रिश्ता आया था। परिवार के साथ लड़की देखने जाने की तैयारी चल रही थी। दो दिन बाद मुंबई लौटने का प्लान था, लेकिन किसे पता था कि यह उसकी आखिरी यात्रा होगी।
वह रात जो बदल गई सब कुछ
24 दिसंबर की शाम को घर में सब सामान्य था। मां खाना बना रही थीं। विशाल डाइनिंग टेबल पर बैठा भोजन कर रहा था। तभी उसके मोबाइल पर एक कॉल आई। कॉल प्रेमिका की थी। विशाल ने फौरन खाना छोड़ा, मां से कहा – “मां, बस थोड़ी देर में लौट आऊंगा।” और वह घर से निकल गया।
रात करीब 9:30 बजे की बात है। मां को लगा कि लड़का मिलने जा रहा है और जल्दी वापस आएगा। लेकिन रात बीत गई, सुबह हो गई, विशाल नहीं लौटा। फोन स्विच ऑफ था। परिवार ने तलाश शुरू की, लेकिन कहीं कोई सुराग नहीं मिला।
अगली सुबह, यानी 24 दिसंबर को, राहगीरों की नजर एक गेहूं के खेत में पड़ी। वहां मिट्टी से सना एक शव पड़ा था। सूचना मिलते ही ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। पुलिस पहुंची, शव की तलाशी ली गई। जेब में मोबाइल फोन और बाइक की चाबी मिली, जिससे पहचान हुई – यह विशाल यादव था।
शव की हालत देखकर किसी का भी दिल दहल उठा। सिर पर भारी चीज से कई गंभीर वार, मुंह से खून बहता हुआ, शरीर पर मिट्टी लगी हुई। आसपास मिट्टी उखड़ी हुई थी, संघर्ष के साफ निशान थे। शव से कुछ दूरी पर चप्पलें और एक तौलिया भी मिला। प्रारंभिक जांच में लगता है कि युवक को जिंदा खेत में लाया गया, वहां उसने अपनी जान बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन हमलावरों ने सिर पर वार करके उसकी हत्या कर दी।
परिवार का दर्द और आरोप
शव देखते ही मां शकुंतला देवी और छोटे भाई छोटू का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिवार का इकलौता कमाने वाला चला गया। मां ने पुलिस को बताया कि वह कॉल प्रेमिका की थी। परिवार ने सीधे प्रेमिका, उसके पिता और भाई पर हत्या का आरोप लगाया। उनकी तहरीर पर सहजनवां पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया।
गोरखपुर के एसपी नॉर्थ ज्ञानेंद्र नाथ प्रसाद ने मीडिया को बताया, “24 दिसंबर की सुबह खेत में युवक की लाश मिली थी। परिजनों की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। तीन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।”
क्या कहती है जांच?
पुलिस ने मोबाइल कॉल डिटेल्स, घटनास्थल पर मिले सबूत और परिजनों के बयानों के आधार पर जांच शुरू की। प्रेमिका और उसके परिवार से पूछताछ हो रही है। अभी तक कोई फाइनल निष्कर्ष नहीं निकला, लेकिन परिवार का दावा है कि यह प्रेम संबंध से जुड़ा विवाद था।
विशाल की जिंदगी सपनों से भरी थी। वह मेहनतकश था, परिवार का सहारा था। शादी की तैयारी में था, मुंबई लौटकर नई शुरुआत करने वाला था। लेकिन एक कॉल ने सब खत्म कर दिया।
यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि रिश्ते कितने नाजुक होते हैं। प्यार की एक कॉल खुशी भी ला सकती है और मौत भी। गोरखपुर का यह मामला आज भी अनसुलझा है। परिवार न्याय की उम्मीद में है। पुलिस की जांच से उम्मीद है कि सच सामने आएगा और दोषियों को सजा मिलेगी।
यह कहानी सिर्फ एक हत्या की नहीं, बल्कि टूटे सपनों, परिवार के दर्द और समाज में बढ़ते रिश्तों के खतरे की है। विशाल जैसा युवा कभी नहीं लौटेगा, लेकिन उसकी मौत हमें सतर्क करेगी।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सूचना और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें वर्णित सभी घटनाएं सार्वजनिक रूप से उपलब्ध समाचार स्रोतों पर आधारित हैं। हम किसी भी व्यक्ति या पक्ष को दोषी/निर्दोष घोषित नहीं करते। जांच अभी चल रही है, अंतिम निष्कर्ष अदालत द्वारा ही होगा। किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई या निष्कर्ष के लिए आधिकारिक पुलिस/न्यायिक रिपोर्ट का इंतजार करें। लेख में व्यक्तिगत राय या अफवाहें शामिल नहीं हैं।

