यमुना एक्सप्रेसवे पर कोहरे का प्रकोप: 13 की मौत, सिस्टम की लापरवाही ने बढ़ाई दर्द की तीव्रता
मथुरा, 18 दिसंबर 2025: सर्दियों की छुट्टियों के बीच यात्रा की खुशी को एक भयानक हादसे ने कर दिया धूमिल। यमुना एक्सप्रेसवे पर आज तड़के घने कोहरे के कारण एक भयावह दुर्घटना घटी, जिसमें सात बसों और तीन कारों की आपसी टक्कर हो गई। टक्कर के तुरंत बाद वाहनों में भीषण आग लगने से 13 लोगों की जलकर दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कम से कम 25 अन्य घायल हो गए। यह हादसा माइलस्टोन 127 के निकट, आगरा से नोएडा की ओर जाते समय करीब सुबह 4:30 बजे हुआ, जब दृश्यता लगभग शून्य हो चुकी थी।
घायलों को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां कई की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कोहरे की चादर ने न केवल चालकों की दृष्टि छीन ली, बल्कि वाहनों की तेज रफ्तार ने हालात को और विपरीत बना दिया। एक बस डिवाइडर से टकराई, जिसके बाद पीछे की गाड़ियां लगातार आपस में भिड़ती चली गईं। आग की लपटें इतनी प्रबल थीं कि यात्रियों को भागने का मौका ही नहीं मिला। बच निकले यात्रियों ने बताया कि वे सोए हुए थे जब बसें आगे की टक्कर में फंस गईं। किसी तरह शीशों को तोड़कर वे बाहर निकले, लेकिन तब तक कई जिंदगियां राख हो चुकी थीं।
हादसे की मुख्य वजह: कोहरा और अपर्याप्त तैयारी
इस दर्दनाक घटना की प्राथमिक वजह घना कोहरा ही रहा, जो सर्दियों में उत्तर भारत के एक्सप्रेसवे और हाईवे पर एक गंभीर खतरा बन जाता है। दृश्यता की कमी के कारण चालक वाहनों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखने में असमर्थ रहे। हालांकि, प्रत्यक्षदर्शियों और प्रभावित परिवारों ने प्रशासन की लापरवाही पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सूचना मिलने के बावजूद पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर देरी से पहुंचीं। एक प्रभावित महिला ने बताया, “मैंने पुलिस को पांच बार फोन किया, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। आग शुरू में छोटी थी, यदि समय पर सहायता मिली होती तो कई जानें बच सकती थीं।”
हादसे के बाद दमकल वाहन पहुंचे और आग पर काबू पाया गया, लेकिन तब तक भारी क्षति हो चुकी थी। बसें राख के ढेर और कारें मलबे के टुकड़ों में तब्दील हो चुकी थीं। घायलों को अस्पताल ले जाते समय परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था—कुछ अपने अपनों को खो चुके थे, तो कुछ उम्मीद की डोर थामे इंतजार कर रहे थे। एक यात्री ने कहा, “हम गोरखपुर से चंडीगढ़ जा रहे थे। अचानक टक्कर हुई और आग लग गई।”
सिस्टम की कमियां: राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर
यह हादसा न केवल मानवीय क्षति का प्रतीक है, बल्कि सड़क सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलता है। एक्सप्रेसवे पर लाइटिंग की अपर्याप्त व्यवस्था, चेतावनी प्रणाली की कमी और पुलिस गश्त का अभाव प्रमुख मुद्दे उभरे हैं। चश्मदीदों ने शिकायत की कि हादसे के समय कई जगह लाइटें बंद पड़ी थीं और वाहन चालकों को कोहरे की पूर्वसूचना नहीं दी गई। राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। विपक्ष ने सरकार पर लापरवाही का ठीकरा फोड़ा, जबकि सत्ताधारी पक्ष ने पूर्व कार्यकालों के हादसों का हवाला देकर जवाब दिया। एक विपक्षी नेता ने कहा, “लाइटिंग और पेट्रोलिंग के दावे खोखले साबित हो गए। अथॉरिटी को कमीशन से ऊपर जनजीवन की सुरक्षा प्राथमिकता देनी चाहिए।”
सर्दियों में सुरक्षित सफर के लिए आवश्यक सावधानियां
सर्दी के मौसम में कोहरा बढ़ने वाला है, इसलिए यात्रियों को सतर्क रहना होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, इन छोटी-छोटी सावधानियों से बड़े हादसे रोके जा सकते हैं:
- गति नियंत्रण: कोहरे में वाहन की रफ्तार 40 किमी/घंटा से अधिक न रखें।
- दूरी बनाए रखें: आगे के वाहन से कम से कम 100 मीटर की दूरी सुनिश्चित करें।
- हेडलाइट का सही उपयोग: लो बीम हेडलाइट का ही प्रयोग करें; हाई बीम दृश्यता को और कम कर सकता है।
- लेन अनुशासन: अपनी लेन में रहें और ओवरटेकिंग से बचें।
- आपात स्थिति: यदि कोहरा असहनीय हो, तो वाहन को सुरक्षित स्थान पर रोकें, हैजर्ड लाइट चालू करें और कोहरे के छंटने का इंतजार करें।
सरकार और सड़क प्राधिकरण को भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी—चेतावनी बोर्ड, बेहतर लाइटिंग और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली विकसित कर। सावधानी ही सुरक्षा की कुंजी है; आइए, इस हादसे से सबक लें ताकि आने वाले सफर सुरक्षित रहें।
(यह रिपोर्ट प्रत्यक्षदर्शियों, आधिकारिक सूत्रों और घटनास्थल के विश्लेषण पर आधारित है। अधिक अपडेट के लिए बने रहें।)

